[मुखड़ा]
संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं
जो चिट्ठी आती है, वो पूछे जाती है
के घर कब आओगे, के घर कब आओगे
लिखो कब आओगे
के तुम बिन ये घर सूना, सूना है
[अंतरा 1]
ये दिल जो बरसों से था खाली-खाली सा
किसी के आने से सजा दिवाली सा
जगे हैं दरवाज़े किसी की आहट से
सवेरा होता है किसी की करवट से
मैं सोचा करता हूँ यही तन्हाई में
के चंदा उतरेगा मेरी अंगनाई में
[अंतरा 2]
ये पूछो आँखों के झलकते पानी से
बिछड़ता है कोई कहाँ आसानी से
मैं पीछे छोड़ आया, दुआएं करती माँ
के उससे भी प्यारी,[अंतरा 3]
बड़ी याद आती है, किसी की रातों में
कलाई रेशम सी, अभी है हाथों में
शायरी जैसी वो, लबों पे रहती है
मोहब्बत जैसी वो, रगों में बहती है
जो गुड़ियों से खेले, वो गुड़िया याद आए
के बातों-बातों में उसी की बात आए
[ब्रिज/आउट्रो]
ऐ गुज़रने वाली हवा बता, मेरा इतना काम करेगी क्या
मेरे दिलबर को मेरा पैगाम दे, मेरा इतना काम करेगी क्या
मुझे छोड़ के जो चला गया, उसे ढूंढ ला
कोई रह-गुज़र या कोई गली, मुझे आज तक तो नहीं मिली
जो मिटा सके ये फासला, जो मिटा सके ये फासला
मेरी सारी जवानी ले गया, और आँख में पानी दे गया
जिसे दोहराऊंगा उम्र भर, वो ऐसी कहानी दे गया
ऐ गुज़रने वाली हवा तुझे, है कसम ना ऐसे रुला मुझे
मैं कहाँ से लाऊं वो दिल बता, जिसे हो कुबूल ये अलविदा
[अंतिम भाग]
मैं वापस आऊंगा, मैं वापस आऊंगा
फिर अपने गाँव में, प्यार की छाँव में
तरसती आँखों से, किसी की बाहों से, के घर की राहों से
किया जो वादा था वो निभाऊंगा
मैं वापस आऊंगा, मैं वापस आऊंगा... मुझे ये धरती माँ