हर बात पर हँसते हैं बंदों के काम,
खींच बंदों में होता नहीं है खड़े होने का दम।
आते मूंछों की तरह फेंक जब लगती हैं गालियाँ,
नकली दाढ़ी बनाकर जो निकालते हैं गालियाँ।
नकली दाढ़ी बनाकर जो निकालते हैं गालियाँ,
जूती घूमती है फरोख़ी फिर मारते हैं चालें।
नकली दाढ़ी बनाकर जो निकालते हैं गालियाँ,
जूती घूमती है दम फेस मारते हैं चालें।
बैठकर शीशे के सामने फीलिंग ले जाते हैं बोन्गे बेयर,
अंदर से टूट जाता है जिगर जब मिलते हैं स्वाशर।
बैठकर शीशे के सामने फीलिंग ले जाते हैं बोन्गे बेयर,
अंदर से टूट जाता है जिगर जब मिलते हैं स्वाशे...