जिसे मैं अच्छी नहीं लगती
वो मेरा ज़िक्र न करे
जिसे मैं अच्छी नहीं लगती
वो मेरा ज़िक्र न करे
मैं मूर्ख सही, आवारा सही
कोई मेरी फ़िक्र न करे
जिसे मैं अच्छी नहीं लगती
वो मेरा ज़िक्र न करे
यहाँ सवा करोड़ पत्रकार और सवा करोड़ बुत हैं
बुद्धिजीवी गुम हो गए, बिजलियों का झुंड भरा है
बहुत से ख़बरी भी आजकल अड्डे बने हैं कलेश के
अकल के बिना भी मित्रों जोड़ी बैठ गए हैं देश के
यार-वैर कोई नहीं है जी, रिश्ते लालच से भरे
जिसे मैं अच्छी नहीं लगती
वो मेरा ज़िक्र न करे
यहाँ अक़्ल को...